मा. मुख्यमंत्री महोदय शासन प्रशासन को भ्रष्टाचार मिटाने हेतू पुलिस विभाग से हटकर एक ऐसा विभागीय नंबर जनता को दिया जाना चाहिए जिसमें वसूलीबाज पुलिस कर्मियों, विभागीय भ्रष्ट अधिकारियों, भ्रष्ट नेताओं, भ्रष्ट पत्रकारों की शिकायत जनता सीधे कर सके जिस विभाग की शिकायत हो उस विभाग के अधिकारी जांच में शामिल न किए जाय ताकी उन पर गुण व दोष के आधार पर तत्काल कार्यवाही हो सके।
उदाहरण के तौर पर यदि पुलिस विभाग की शिकायत हो तो उसकी जांच आर्मी या सीआरपीएफ के अधिकारी करे।
प्रायः देखा जा रहा है कि जनता जन सुनवाई (IGRS) के माध्यम से जो शिकायत करती है क्षेत्रीय पुलिस उस पर अपनें आपको बचाते हुए गलत आख्या लगाकर मामला निस्तारित दिखा देती है और जनता जिस उम्मीद से मा. मुख्यमंत्री से जो सहयोग की अपेक्षा रखती है वह टूट जाती है और जनता सरकार की भ्रष्ट तंत्र से तंग आकर या तो शांत होकर बैठ जाती है या तो खुदकुशी कर लेती है। इसलिए पुलिस विभाग की शिकायतों के निस्तारण हेतु अन्य ऐसा विभाग जांच करे जो पुलीस व्यवस्था से निडर होकर निष्पक्ष जांच करते हुवे कार्य कर सके।
यदि भ्रष्ट्राचार केडीए, रजिस्ट्रार कार्यालय अथवा किसी भी विभाग का हो उसकी जांच सीआईडी या अन्य निडर जांच एजेंसी करे।
जन मानस का कहना है कि ऐसा करने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और दोष सिद्ध होने पर ट्रांसफर नहीं बल्कि नौकरी से निकालकर जुर्माना अलग से लगाया जाय ताकि भ्रष्ट्राचार करने से पूर्व ऐसा डर हो कि यदि वो गलत करेंगे तो नौकरी तो जायेगी ही बल्कि जुर्माना और जेल अलग से होगी ।
जन मानस की तरफ से हमने विचार रखा है इसे लागू किया जाना या न किया जाना वो शासन प्रशासन का अपना मत होगा। कृपया जैसा उचित हो वैसी प्रतिक्रिया अवश्य दे।
लेखक – एम डी शर्मा (कलम का एक छोटा सिपाही)
सेवक – नेशनल मीडिया प्रेस क्लब

